एक सख्स

एक सख्स है जो नाराज भी नहीं हैमगर पहले जैसा भी नहीं हैगुमसुम सा हैकुछ कहता भी नहीं हैमैं पूछूं भी तो क्या पूछूं उससेमुझे पूछने का कुछ हक भी तो नहीं हैबड़ी उलझन बढ़ा दी है उसने मेरी अपनी खामोशियों से हैंवो कभी इतना चुप रहता भी तो नही हैएक आदत सी हैउसकी बकबक सुनने कीअब जो डर लग रहा हैवो कुछ कहता ही नहीं है

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  1. डी. के. निवातिया 02/02/2019

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