फिर मुलाकात होगी कभी

जो हो न सकीइस बार तोफिर मुलाकात होगी कभीइस जनम में न सहीतो अगले जनम में हीं कहीये चांद रहेगा और रहेगा सूरज भीतुम भी अपनी चाँदनी लिए रहनामैं थोड़ा देर से आऊँ गर तोतो तुम मेरा इंतज़ारपूरी शिद्दत से करनाउसी पेड़ की ओट मेंजिसमे खींची है मैंनेतुम्हारे नाम की लकीरेंक्या हुआ जो रास्ते बदल गए इस बारअगली बार थमेंगे मंजिल पर ही कहींआखिर ,कुछ तो रहनी चाहिए कमीफिर मुलाकात होगी कभीग़म तो है बहुतकी इस बार तुमसे कुछ कह न पायाखैर अगली बार ही सहीतुमसे होगी फिर बातकहीं न कहींइस जनम में न सहीतो अगले जनम में ही कहीं—-अभिषेक राजहंस

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  1. C.M. Sharma 29/01/2019

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