सब लौटा आया हूँ

गुमनामियाँ अपने हिस्से रख करआज उसे उसकी यादें लौटा आया हूँजो भी रह गया था ,मेरे पास उसकासब लौटा आया हूँआज उसके यहाँ रौशनी फैला करखुद को अंधेरा कर आया हूँएक बार और अपने दर्द पर मुस्कुरा कर महफ़िल जगा आया हूँआज फिर मैंने डाल दिया है पर्दाआज फिर रोक लिया हूँ खुद कोवो किसी और की होने वाली हैं आजबस इसलियेउसके आँगन में शहनाई बजा आया हूँ-अभिषेक राजहंस

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2 Comments

  1. Bhawana Kumari 24/01/2019
  2. C.M. Sharma 29/01/2019

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