कर्तव्य की गठरी – शिशिर मधुकर

एक बात मन की दोस्तों तुमको बतानी हैकुछ दर्द में डूबी फ़कत अपनी कहानी है ढूंढा जिसे उल्फ़त मुझे न कोई मिल सकीग़म झेलती देखो तन्हा कब से जवानी हैजिसके सहारे ज़िन्दगी की मार मैं सह लूँ मुहब्बत की न कोई पास में मेरे निशानी है दुनिया मेरे अरमान की तो कब से लुट चुकीकर्तव्य की गठरी फ़कत अब तो उठानी हैअब किसी सावित्री का किस्सा नहीं मिलता तुम मान लो मधुकर कि वो शिक्षा पुरानी है शिशिर मधुकर

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4 Comments

  1. Bhawana Kumari 21/01/2019
    • Shishir "Madhukar" 23/01/2019
  2. C.M. Sharma 29/01/2019
    • Shishir "Madhukar" 29/01/2019

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