चीनी का बोरा

लहजे में फिजा मेंमिठास है घर मेशीतल सुमन सुवास हैप्रभास है घर में।गमो की घुड़दौड़ परनन्ही लगाम हैसुबह सुहानी मदमस्त शाम है।हवा सम्हल जातुनकमिजाज है घर मेंपंख नही है मगरपरवाज़ है घर में।नन्ही है नटखटचिरैया सी हैफुदकती आंगन मेंगौरइया सी है।मासूम से सवाल है जवाब हैं घर मेंस्लेट है कापी कलमकिताब है घर में।सिक्कों भरी गुल्लक हैइतवार का दिन हैआज खिलौनों केबाजार का दिन है।नाजुक सी मिन्नतों कादरबार है घर मेंक्या लूँ कि अभीचीजों का अंबार है घर में।कौन अधिक प्रिय हैमीठी तकरार हैबेटे से शुकून हैकि बेटी से करार है।नाराज है कोईफिर आवाज है घर मेंरूठने मनाने कारिवाज़ है घर में।नित नए नाम सेपिटता ढिंढोरा हैयाद है किसी ने कहावो ‘चीनी का बोरा’ है।तू है नही मगरतेरी पुकार है घर मेंतेरे बिना सूना संसार है घर मे।-देवेंद्र प्रताप वर्मा”विनीत”

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2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 19/01/2019
  2. C.M. Sharma 23/01/2019

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