आवो, स्वप्न सकल सुन्दर कर लें

 आवो, स्वप्न सकल सुन्दर कर लें। पोंछ पोंछकर सब अश्रूकणों कोनव सपनों का निर्माण करेंपलकों के आँगन में फिर से हममुस्कानों का सुन्दर रास रचें। आवो, स्वप्न सकल सुन्दर कर लें। गीतों में अमृत का संचार करस्वप्न गीत का यूँ श्रंगार करें।युग युग से पीड़ित अपने मन कीपीड़ा कंठों की सब दूर करें। आवो, स्वप्न सकल सुन्दर कर लें। तेरी गोदी में सोकर हम सबफिर से सुखद सपन उपजायेंजब जागें तो हम सब मिलकरदिव्य स्वप्न सब साकार करें। आवो, स्वप्न सकल सुन्दर कर लें। सपनों में दर्शन तेरा पाकरजग क्रंदन का संहार करेंजब जागें तब भक्ति भाव सेश्रद्धा सुमन से नव श्रंगार करें। आवो, स्वप्न सकल सुन्दर कर लें। जीवन की जड़ता तज हमशांत चित्त से सपनों में घूमेंनव जीवन की आभास करातीप्रकाशपुंज में हम नित खेलें। आवो, स्वप्न सकल सुन्दर कर लें। सपनों के सागर में नैय्या भीतूफानों से ही संबल पावेंऔर किनारे वह देख तुझे तबहर्षित हो द्रुतगति भी पा जावें। आवो, स्वप्न सकल सुन्दर कर लें। जब भी सपनों से हम जागेंपूरब में खिलता सूरज पावेंस्वर्णिम किरणों से सजधज तबपंख पसारे उम्मीद जगायें। आवो, स्वप्न सकल सुन्दर कर लें। स्वप्नकुंज में पल पल पलतीनव अभिलाषा की ज्योत जगा लेंचुनकर कलियाँ सत्य तत्व कीसाकार सपन की माला गुँथ लें। आवो, स्वप्न सकल सुन्दर कर लें।…. भूपेन्द्र कुमार दवे00000 

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  1. C.M. Sharma 14/01/2019

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