मस्त बदन – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

मस्त बदन में रवानी आईयाद फिर से पुरानी आई।गदरा या है तेरा यौवनजन्नत से ये जवानी आई।।फूलों सा लगता है चेहराउस पर लग जाता है पहरा।हलचल मन तुफानी आईजन्नत से ये जवानी आई।।जो देखे वो घायल होतातेरा ही सब कायल होता।हर मोड़ नयी कहानी आईजन्नत से ये जवानी आई।।काली जूल्फें होठ रसीलेगाल गुलाबी नयन ये नीले।नखरों में नादानी आईजन्नत से ये जवानी आई।।ख्यालों में रहती है खोईनजरों में बस जाता कोई।सपना ये मनमानी आईजन्नत से ये जवानी आई।।

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  1. C.M. Sharma 14/01/2019

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