जोत – शिशिर मधुकर

हवा की देख फितरत है बुझाती दीप चलती है जोत पर प्रेम की हर पल मेरे सीने में जलती है मुहब्बत हो गई एक बार फिर ये मिट नहीं सकतीजवानी चाहे हर एक रोज़ हम दोनों की ढलती है तेरे दिल से मिला है दिल और खुशबू है सांसो मेंमगर बाहों की ये दूरी मुझको हरदम ही खलती हैतड़प का क्या कहूँ तुझसे हाल तू देख ले आ केआस तुझसे मिलन की मेरे इस सीने में पलती हैमुहब्बत की नहीं जाती ये तो खुद ही से होती हैना इसमें तेरी गलती है ना ही मधुकर की गलती हैशिशिर मधुकर

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6 Comments

  1. C.M. Sharma 11/01/2019
    • Shishir "Madhukar" 12/01/2019
      • C.M. Sharma 14/01/2019
        • Shishir "Madhukar" 14/01/2019
  2. डी. के. निवातिया 11/01/2019
    • Shishir "Madhukar" 12/01/2019

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