अरज – शिशिर मधुकर

निखारोगे ना रिश्ता जो धूल तो जम ही जाएगीबहती धारा मुहब्बत की सूख के थम ही जाएगीमुझसे कह दे वो गर यादें मेरी सीने में जिंदा हैंये धूनी इश्क की फिर तो अकेले रम ही जाएगीजो फितरत मुहब्बत की खुदा ने मुझको बख्शी हैउमर भर वो निकाले शायद ये सारा दम ही जाएगीरोशनी इश्क की जब भी किसी के पास में होगी बिना सोचे मिटाती वो तो मन का तम ही जाएगीअरज मधुकर करे तुमसे मुझे बस प्यार वो दे दोकलम वरना ये उसकी बस लिखाती ग़म ही जाएगीशिशिर मधुकर

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4 Comments

  1. C.M. Sharma 11/01/2019
    • Shishir "Madhukar" 12/01/2019
      • C.M. Sharma 14/01/2019
        • Shishir "Madhukar" 14/01/2019

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