ये क्या हो रहा है

कुछ और अबदिख नहीं रहा हैये कैसी सजा हैदिल रिहा होना नहींचाह रहा हैअजीब ही कुछ मेरे भीतरघट रहा हैहर तरफ बस वो हीदिख रही हैआज हिचकियाँबड़ी जोर से आ रही हैक्या वो भी मुझेयाद कर रही हैजाने ये क्या हो रहा हैउसकी बातें रह रह कर जेहन से बाहर आ रही हैउसके खुले केशमुझे बांधे जा रहे हैये क्या है जो उसके ना होने परमुझे बेचैन कर रहा हैक्या उसे भी कुछऐसा ही हो रहा हैजो मैं समझ कर भीसमझना नही चाह रहाक्या उसे कुछ समझ आ रहा हैक्या जो हो रहा है मुझेवो उसकी भी नींद उड़ा रहा हैलोग कह रहे कि इश्क़ हो रहा है तुम्हेऔर ये इश्क़ जानलेवा हैक्या ये इश्क़ उसे भीरब मुझसे करवा रहा है–अभिषेक राजहंस

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2 Comments

  1. C.M. Sharma 11/01/2019
  2. डी. के. निवातिया 11/01/2019

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