प्यासा – शिशिर मधुकर

सुकूँ पाना ज़माने में कभी होता ना आंसा हैकमी जल की नहीँ है पर समुन्दर देख प्यासा हैराह मंज़िल की पाने को चला हूँ मैं तो मुद्दत सेमगर ना रोशनी बिखरी ना ही हटता कुहासा हैबड़ा मजबूत हूँ मैं तो दिखावा सबसे करता हूँ मेरे अशआर में पर हाल ए दिल का सब खुलासा हैगैर तो गैर थे पर चोटें तो अपनों ने दीं मुझकोमगर तू साथ है हरदम यही मुझको दिलासा हैजिसे जो चाहिए वो ही अगर कोई उसे दे देवही इंसान मधुकर फिर तो बन जाता खुदा सा हैशिशिर मधुकर

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6 Comments

  1. Rishi Raj 06/01/2019
    • Shishir "Madhukar" 07/01/2019
  2. डी. के. निवातिया 07/01/2019
    • Shishir "Madhukar" 08/01/2019
  3. C.M. Sharma 08/01/2019
    • Shishir "Madhukar" 08/01/2019

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