ये सरदी का मौसम – शिशिर मधुकर (प्रणय गीत )

ये सरदी का मौसम ये ठण्डी हवाएंचल आ मुहब्बत को फिर से निभाएंतुम जो करम अपना मुझ पे करोगी मेरा दिल ये तुमको ही देगा दुआएंनहीं भूलती मुझको वो जो घड़ी थीजब आँखो से अपनी आँखे लडी थींनज़दीक आपस में हम इतने आए यूँ लगने लगा हर एक दूरी मिटाएंये सरदी का मौसम…………वो बोसा तेरा दर्द ए दिल की दवा थावो उल्फ़त का मंजर कितना जवां थाना दिन की ख़बर थी ना रातें पता थीं चलो वो ही दुनिया हम फिर से सजाएंये सरदी का मौसम……… वो सांसें तेरी कितनी बहकी हुई थीं फूलों की बगिया सी महकी हुई थीं उजडा है जो तेरे बिन अब यहाँ पर आओ फिर से वो गुलशन खिलाएंये सरदी का मौसम………..

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2 Comments

  1. C.M. Sharma 08/01/2019
    • Shishir "Madhukar" 08/01/2019

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