दुनियाँ की दस्तूर – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

मुश्किल में आज फिर हम, ऐसे ही घिर गये हैंनज़रों में आपके हम, फिर ऐसे ही गिर गये हैं।हालात बदल गये या फिर, थे मजबूर इतनेइंसानियत के नाम हम, ऐसे ही फिर गये हैं ।दुनियाँ के दस्तूर में, शराफत बहुत से देखेअपने आप को हम, काठ सा ही चिर गये हैं।अपने तकदीर की बात भी, कुछ नहीं अलग हैदूसरों की गलतियाँ भी, हमारे ही सिर गये हैं।दिखला दूँगा जीतकर, मंजिल को अपने दम परहौसले को बुलंद कर, जंग में ही भिड़ गये हैं।

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

Leave a Reply