मेरी पहली कहानी का दूसरा हिस्सा

समय बहुत तेजी से बदलता है ना, दोस्तो! कब क्या हो जाये कौन जानता है ,किसे खबर होती है । नाज़िया और मैं अब अच्छे वाले दोस्त बन गए थे और मेरा साथ होना उसे पसंद होता था मेरे बार-बार कहने पर उसने थोड़ा मुस्कुराना शुरू कर दिया था और वो खुद को हल्का महसूस करने लगी थी ,फिर एक दिन मैंने उससे पूछा -यार! बताओ ना ,तुम इतनी उदास क्यों रहती थी ,इतनी खूबसूरत हो ,तुम्हे तो हर कोई चाहता होगा.मेरे इतना बोलते ही वो फफक-फफक कर रोने लगी और उसने सिर्फ इतना कहा कि मेरी खूबसूरती मेरी सबसे बड़ी दुश्मन है .मैंने जब उससे कहा कि तुम बताओ ना मुझे सबकुछ ,भरोसा कर सकती हो मुझपे । मेरी बात सुनकर वो चली गई , मैं कहता रह गया ,उसे आवाज भी दिया , पर वो नहीं सुन पायी । उस दिन के कुछ दिन तक वो क्लास आयी ,पर मैंने उससे बात करना छोड़ दिया था ,मैंने उसकी तरफ देखना भी छोड़ दिया था ,और अब मुझे उसके आने का इंतज़ार भी नहीं रहता था, वो कब आती थी ,कब जाती थी मुझे उससे अब कोई फर्क नहीं पड़ता था ,मुझे लगता था ये सेल्फिश और घमंडी लड़की है, इसे किसी की परवाह हो ही नही सकती । मुझे बिल्कुल भी इस बात का पता नहीं चल पाया की इसकी प्रॉब्लम क्या थी ।अब परीक्षाओ का दौर शुरू होने वाला था ,उसने तो अपना क्लास भी छोड़ दिया था. मुझे लगा घर पर ही पढ़ती होगी शायद , एग्जाम के टाइम में लोग सेल्फ स्टडी पे ज्यादा फोकस रहते थे नावक़्त बीतता गया और परीक्षा भी हो गयी ,रिजल्ट भी आ गया सब का, कुछ दोस्त लोग दूसरे शहर जाने का प्लान बनाने लगे और कुछ उसी कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई करना चाहते थे, मैं तो बाहर जाने से रहा, इसलिए मैंने इंग्लिश ऑनस में उसी कॉलेज में एडमिशन लिया. मैंने इंग्लिश के लिए कोचिंग की सोची ,उस वक़्त मेरे शहर में पाठक सर एकलौते ऐसे थे जो ग्रेजुएशन के बच्चों को पढ़ाते थे। फर्स्ट ईयर की क्लास के दौरान मेरे नये-नए दोस्त बने ,उन्ही दोस्तो में एक था निशांत उर्फ राहुल. वो मुझसे उम्र में थोड़ा बड़ा था ,लेकिन मेरी उससे अच्छी ट्यूनिंग बन पड़ी थी आपको बताया नही मैंने पहले पर आपको बता देता हूँ ,मेरे पापा की स्टेशनरी की दुकान थी उस समय , मैं क्लास के बाद दुकान पर बैठने लगा था, पापा बीमार रहते थे मेरे ,इसलिए दुकान की जिम्मेदारी भी मेरे ऊपर आ गयी थी.निशांत चूंकि मेरा अब दोस्त बन गया था इसलिए वो भी मेरे दुकान पर बैठने लगा था, वो शाम तक रुकता था दुकान पर, मेरा भी मन लगा रहा था ,परिवार में पैसों को ले कर प्रॉब्लम थी ये बात जान कर भी मैं दुखी नही रहता था ,क्यों मेरे दोस्त मुझे दुखी रहने ही नहीं देते थे.एक दिन निशांत ने बताया कि मुझे एक लड़की बहुत पसंद है ,मैंने पूछा बताओ यार कौन है वो ,बताओ ना. पर वो टालमटोल कर गया उस दिन और बात आई-गई हो गई। उस टाइम कंप्यूटर सीखना बहुत बड़ी बात होती थी और मेरा भी मन कंप्यूटर सीखने का कर रहा था ,थोड़ा सा रेफेरेंस ले कर मैं एक कंप्यूटर इंस्टीट्यूट गया -इंफोटेक कंप्यूटर. वहाँ के शिक्षक बहुत ही अच्छे लगे मुझे.जब मैंने मजबूरियाँ बताई उन्हें तो उन्होंने भी मेरी पढ़ाई की फीस माफ कर दी । कुछ महीने बाद जब मैं कंप्यूटर क्लास करने आया तो देखा कि सर के सामने दो लड़कियां बैठी हुई थी, मैं दोनों में से किसी का चेहरा नहीं देख पायाऔर अपने लैब की तरफ चल पड़ा, तभी सर ने मुझे पुकारा ,मैंने उनसे पूछा -कहिये सर ,क्या कह रहे हैं ,उन्होंने मुझे कहा कि इन2 दोनों को थोड़ा लैब दिखा दो, कुछ बता भी देना. मैंने कहा ठीक है सर और ये कहकर उन दोनों की तरफ देखा ,जब मैने उनकी तरफ देखा तो देखता क्या हूँ ,मेरे सामने नाज़िया थी वही नाज़िया।मैं टोटल शॉक हो गया था उसके साथ नर्गिस भी थी , नरगिस को भी मैं पहले से जानता था ,हम दोनों केमिस्ट्री क्लास में मिल चुके थेखैर किसी तरह मैं अपने आप पर काबू कर, मन मे काफी सवाल ले कर ,उन दोनों को लैब रूम ले गया। नाज़िया अभी भी चुपचाप सी ही थी ,वो मेरे इंस्ट्रक्शन को सुनती रही और कंप्यूटर के सामने बैठ गईउसके बाद क्या हुआ, मैंने उससे क्या कहा ,मेरी दोस्ती हुई या नहीं फिर से उससेराहुल किससे प्यार करता थाजानने के लिए इंतज़ार करियेमेरी कहानी के अगले भाग कीजिसका नाम है-“कौन किसे कबूल”

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

Leave a Reply