मेरी पहली कहानी का पहला हिस्सा-“कौन किसे कबूल”

मेरी पहली कहानी-कौन किसे कबूलये तकरीबन कुछ दस साल पहले की बात थी ,जब मैं ग्यारहवीं में पढ़ता था , गणित में थोड़ा फ़िसड्डी था इसलिए जीवविज्ञान पढ़ने लगा था ,एक बहुत ही काबिल शिक्षक थे अवधेश सर , उनका नाम था बहुत ,इसलिए मेरी दोस्तो की मंडली ने सोचा ,क्यों न इनसे पढ़ा जाएऔर हम नोटबुक ,किताबे ले कर पूरे काफिले के संग चल पड़े, जब उन्हें देखा तो लगा की ये तो थोड़े बूढ़े है पर उनकी पढ़ाने की ऊर्जा के हम कायल हो गए थे, उनका क्लास ,क्लास लगता ही नहीं थाएक छोटी से कोठली थी बस । मुश्किल से उसमे कुछ बेंच डेस्क लगे थे ,और लड़के लड़की बिल्कुल आमने -सामने बैठते थेमेरे दिलफेंक टाइप के दोस्तों को वो क्लास कुछ ज्यादा ही अच्छा लग गया, वो अपनी चालीसा पाठ करने लग जाते ,अरे! हनुमान चालीसा नहीं , उस चालीसा का नाम तो नहीं याद आ रहा ,क्या कहते थे वो ,पर इतना जरूर याद है कि उसमें वो लड़कियो के बारे में कुछ न कुछ बात बनाते थे जरूर , पर वो बोलते क्या थे मुझे पता नही चलता था ,क्योंकि अपनी भी इज्जत थी ,एक भोले-भाले सीधे इंसान की ,जिसे मैं गँवाना नहीं चाहता था और इसी कारण तो मेरी फीस भी माफ हो गई थीमैं पढ़ने लिखने मैं ज्यादा होशियार तो नहीं था पर मेरी बातें टीचर्स को अच्छी लग जाती थी और वो मेरी फीस माफ कर देते क्योंकि मैं कह देता था -सर मैं गरीब विद्यार्थी हूँ ,पापा के पास इतना पैसा नहीं कि वो मुझे साइंस पढ़ा सके ,मैंने बेकार में साइंस ले लिया तब वो कहते थे- अरे कुछ नही बेटा! तुम पढ़ो ना, पैसा कौन माँग रहा तुमसेमैं खुश हो जाता थाइतनी बकवास सुनने के बाद आप को लग रहा होगा कि मैं ये क्या बकवास सुना रहा आपको , देखिये ये कहानी बिल्कुल भी मेरी नहीं हैं , ये कहानी तो एक लड़की की है नाम था उसका नाज़िया ,नाज़िया हबीबकोई पंद्रह या सोलह साल की बहुत ही खूबसूरत औऱ जहीन लड़की ,जिसके साथ जो भी हुआ ,शायद उससे बेहतर हो सकता था।मैंने उसे पहली बार उसी जीवविज्ञान की क्लास में देखा थादिखने में तो बहुत ही मासूम लगती थी ,उसकी आँखों का तो कोई भी दीवाना बन जाता था मतलब वो टोटल मनोरंजन का साधन बन गई थी ,मेरे लिए नहीं मेरे कुछ दोस्तों के लिए ,मुझे बुरा तो बहुत लगता था पर दोस्त थे मेरे इसलिए कुछ कह नहीं पाता था और वो नाज़िया भी तो कुछ नहीं बोलती थी।एक दिन कुछ ज्यादा ही हो गया ,वो लड़को की फब्तियाँ सुन कर थोड़ी उदास हो गयी,लगा कि अब रो देगी । उस दिन मुझे मेरे दोस्तों पे बहुत गुस्सा आ गयालेकिन किसी तरह मन मसोस कर रह गया। छुट्टी हुई और सब घर की तरफ साईकल ले कर भागें ,पर वो नाज़िया पैदल ही घर की तरफ निकली ,उसका घर पास में ही था ,बीच मे बस दो गली आती थी,मैंने अपने दोस्त जय को साथ लिया और उसका पीछा किया,उस दिन पहली बार मैं किसी लड़की का पीछा कर रहा था ,मैंने उसे आवाज दी -नाज़िया!,नाज़िया! पर वो रुकने का नाम ही नहीं ले रही थीफिर मेरे दोस्त ने तेजी से साईकल उसके सामने घुमा कर लगा दिया , उस दिन पक्का हम गुंडे लग रहे थे और वो हमे देख कर बिल्कुल ही सहम गई थीपूरा साइलेंस हो गया था उस टाइम उस गली में ,हम तीनों के अलावा और कोई आ भी नही रहा था ,ठंड का मौसम था और तकरीबन आठ बज रहे थे,मेरे दोस्त जय ने चुप्पी तोड़ी और उससे कहा-नाज़िया ये तुमसे कुछ कहना चाहता है ,तो उसने मेरी तरफ देख कर कहा -बोलो,क्या बोलना हैं. मैंने उससे कुछ कहा ही नही ,उसके दुबारा टोकने पर मैंने इतना कहा-नहीं, कुछ नही बस ऐसे ही। वो मेरी बात सुनकर आगे चल पड़ी ,और मैं अपने रास्ते । उसके बाद करीब एक सप्ताह वो क्लास नहीं आयी इस बीच मैं रोज उसके घर के दरवाजे की तरफ देखता,पर वो नज़र ही नहीं आतीवो एक दिन आखिर आ ही गयीऔर आने के साथ उसने मुझसे नोट्स माँगे ,जो भी सर ने पढ़ाया था इस बीच। मैंने बिना कुछ कहे उसे दे दिया और उसने नोट्स ले ली ,पर उसने थैंक यू भी नही बोला.दो दिन के बाद उसने नोट्स लौटा दी और फिर कुछ नहीं बोली, मैंने उस दिन उसे कुछ नही बोला और रास्ते मे सायकल चलाते हुए बस इतना ही सोच रहा था कि यार ये लड़की कैसी है ,मैंने इसकी इत्ती हेल्प की और ये कुछ बोली ही नहीं , लेकिन मेरा ये सोचना गलत साबित हो गया घर पहुँचते ही। जैसे ही मैंने अपनी नोटबुक खोली तो उसमें से एक पेज गिरा,आपको क्या लगता है उसमें क्या लिखा होगा । उसमे अंग्रेज़ी में thank you लिखा हुआ था और ये भी की मेरे दोस्त बनोगे तुम, उस दिन बहुत खुश हुआ मैं बिल्कुल वैसे ही जैसे किसी छोटे बच्चे को अचानक से कोई लॉलीपाप थमा दे । उसके बाद हमारी दोस्ती चलने लगी थी और कुछ लोगो के दिल मे जलन हो रही थी,पर जो भी था ,कहानी शुरू हो गयी थी .आपको ऐसा लगता होगा कि नायिका तो नाज़िया है इस कहानी की और नायक मैं, पर ऐसा कुछ भी नहीं है ,जैसा आप सोच रहे।आप ज्यादा मत सोचिये ,जल्दी ही लिखता हूँ इस कहानी की अगली कड़ी

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

2 Comments

  1. C.M. Sharma 29/12/2018
    • Abhishek Rajhans 29/12/2018

Leave a Reply