सत्ता की आग – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

सत्ता की आग में अब जल रहे नेताकुर्सी पाने को आज मचल रहे नेता।हर जगह राजनीति की बात चल रहीबात अपनी बनाकर निकल रहे नेता।भाषण में वादों का जमघट हैं लगातेअपनी बातों पर ही फिसल रहे नेता।सिंचाई छोड़ पाँव खिंचाई करते हैंएक दूसरे से ऐसे अब जल रहे नेता ।जीत कर चुनाव बदल जाते हैं ऐसेगरीबों को ही हमेशा दल रहे नेता।शिक्षा – समाज सब को ये खरीद रहेहमारे सभ्य संस्कृति को छल रहे नेता।मंहगाई – बेरोजगारी पे नहीं होते चर्चेराज खाकर नीति को निगल रहे नेता।

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

2 Comments

  1. डी. के. निवातिया 27/12/2018
  2. C.M. Sharma 29/12/2018

Leave a Reply