मुझे क्या पता था

मुझे कैसे खबर न हुआकी कोई मेरी भी खबर रखता हैमुझे क्या पता थाकी कोई मुझे मुझसे ज्यादा जानता हैमुझे कहाँ पता थाकिसी पर मेरा भी असर रहता थानहीं जानता था मैंमैं किसी और के भीतर भीरह रहा थाकोई मेरी साँसों को भी जी रहा थाराहों ने भटकाया था बहुतमुझे क्या पता था वो मंजिल की तरह आया थाआज उसका पता ढूंढ़ने से मिलता नहीं हैआँखों मे आँसूउसके न होने से रुकते नहीं हैआज उसका न होना खलता है मुझेनैन तलबगार हो रही उसे देखने कोधड़कने बेज़ार हो रही हैएक उम्मीद की हवा तो बहेजो उसके आने की उम्मीद बढ़ाएक्या मैं समंदर बन जाऊं वो नदी बन कर मिलने आ जायेकोई कबूतर उड़ता हुआ आयेउसके आने की खबर दे जाएं–अभिषेक राजहंस

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

2 Comments

  1. C.M. Sharma 26/12/2018
  2. डी. के. निवातिया 27/12/2018

Leave a Reply