पैसा – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

हम दरिद्र पर रहम कैसा हैमन में सबका वहम पैसा है।ना साथ जायेगा न रहेगाआदमी का करम पैसा है।धन – दौलत है केवल नाम कामाया – जाल ये भरम पैसा है।बेच तक देते अपनी जमीरइतना यहाँ ये खतम पैसा है।रिश्ते – नाते भूल सब जातेइतना अब बे -शरम पैसा है।भूल जाते औकात अपनीउनके लिये कशम पैसा है।गरीब बेचारा बिन्दु का क्याजितनी आता हजम पैसा है।

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2 Comments

  1. C.M. Sharma 26/12/2018

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