बच्चों का हक (CHILD’s RIGHTS)

दुनिया की सच्चाई समेट, कैसी बातें ये हम लिखतेखुशी मिले जिनके हिस्से, उनके हिस्से में गम दिखतेजब घर के अंधियारों तले, वे उजियारे से बेखबर मिलीछोटी नन्ही जान जब मुझको, बोझ के नीचे दबी मिलीसूरज से पहले उठती है, और सूरज के बाद ही सोती हैकंधों पर घर का बोझ लिये, अपना बचपन वो खोती हैखेल-खिलौने, गुड़िया, झूला, स्कूल, माँ की लोरीये सब क्या होता भईया, नन्ही जान मुझसे बोलीसन्न पड़ गया बात से उसकी, कैसी ये इसकी हालत हैअंदर से जो खोखला पड़ा, ऐसे इक देश की मानक हैपेट भरने को एक रास्ता, नन्ही जान की मजदूरी हैनन्हे फूलों की शादी करने को, घर की तैयारी पूरी हैरीति-रिवाज पुराने वालो की, ये जानकारी अधूरी हैनन्ही जान की क्या गलती, ये तो इनकी मजबूरी हैपानी सिर से ऊपर निकले, पहले ही कदम उठाने होंगेनन्ही जान का हित हो जिसमें, ऐसे बदलाव लाने होंगेउभरता हिंदुस्तान मिले, सच मे बदलता ख्वाब मिलेनन्ही जान के हाथों में अब, बोझ नही किताब मिले कवि – मनुराज वार्ष्णेय

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4 Comments

  1. C.M. Sharma 24/12/2018
  2. Bindeshwar Prasad sharma 24/12/2018

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