वो सच नहीं थी

वो सच नहीं थीबस एक कल्पना ही थीबेकार ही मैं उसे अपनी सांसो का हिस्सा बनाने चला थाज़िन्दगी का किस्सा सुनाने चला थावो बस चलती हवा का झोंका थीकुछ और नहीं बस धोखा थीबड़ी तबियत से देखता था उसेमुझे क्या पता थावो सच नही थीबस एक कल्पना ही थीआंखों में बसी अधूरा सपना थीहाँ ,मुझे समझ मे आ गयावो ,वो नहीं थी जो मुस्कुरा कर मेरी ओर देखती थीजो अपने रेशमी केशो में मुझे उलझा देती थीजो मुझे स्पर्श कर मेरे होने का एहसास करा देती थीजो अपने पायल की आवाज से मुझे जगा देती थीवो ज़िन्दगी नहीं बन पायी थीक्योंकि वो सच नही थीबस एक कल्पना थी-अभिषेक राजहंस

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  1. C.M. Sharma 24/12/2018

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