जुदाई तुमको भाती है – शिशिर मधुकर

ये कैसा प्रेम है, मुझको नहीं तुम, याद करते होमैं कैसे मान लूँ, तुम मेरी छवि, सीने में धरते होदर्द तुमको अगर होता, तो चेहरे से, बयां होताजुदाई तुमको भाती है, तुम तो ऐसे, संवरते होबस एक सूरत है पहचानी, नहीं है, कोई भी नाता मेरे नज़दीक से, तुम तो फ़कत, ऐसे गुजरते होमुझे भी वो हुनर दे दो, फ़कत है पास, जो तेरे सहारे जिसके ले के तुम, हकीक़त से, मुकरते होइस राहे मुहब्बत में, चोट तो, लग ही जाती हैउन्हें तुम भूल के, मधुकर, नहीं अब क्यों उबरते होशिशिर मधुकर

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

4 Comments

  1. sarvajit singh 15/12/2018
    • Shishir "Madhukar" 15/12/2018
  2. डी. के. निवातिया 15/12/2018
    • Shishir "Madhukar" 15/12/2018

Leave a Reply