रात तन्हाई की – शिशिर मधुकर

चाह फूलों की थी मुझको, मगर कांटों ने घेरा हैनज़ारा कौन सा कुदरत ने देखो,आखिर, उकेरा है मुहब्बत की चाह रखना, गुनाह कोई नहीं होतामगर इस वक्त ने देखो, हर एक, सपना बिखेरा हैरात तन्हाई की देखो, अब तो इतनी हुई लम्बीना ही तो नींद आती है, ना ही, होता सवेरा हैखुशी की चाह में मैंने, कभी अपनों की ना मानीमेरे दिल में आज देखो, गमों का, बस बसेरा हैसफ़र पूरा किया सबने, इन्हीं राहों पे चल चल के मगर मधुकर देख तुझको, मिला, कातिल लुटेरा हैशिशिर मधुकर

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

10 Comments

  1. SALIM RAZA REWA 13/12/2018
    • Shishir "Madhukar" 13/12/2018
  2. sarvajit singh 13/12/2018
    • Shishir "Madhukar" 13/12/2018
  3. डी. के. निवातिया 13/12/2018
    • Shishir "Madhukar" 14/12/2018
  4. C.M. Sharma 14/12/2018
    • Shishir "Madhukar" 14/12/2018
  5. Ranjeet sinha 14/12/2018
    • Shishir "Madhukar" 15/12/2018

Leave a Reply