क्या करूँ अब और मैं

बहुत थक गया हूँ मैंअब और चला नहीं जातासांसे ले लेता हूँ किसी तरहअब और जिया नहीं जाताज़िन्दगी अकारण ही लगती है मुझेबेकार में सब को तखलीफ़ देता हूँकोई मुझे अपना नही मानताकोई मेरे दिल की बात नही समझताख्वाब देखने की कोशिश रोज करता हूँपर कमबख्त कोई ख़्वाब आंखों में नहीं ठहरताक्या करूँ अब और मैंअब तो बस अतीत बन जाना चाहता हूँजीवन का कोई संगीत नही बचाबस इसलिए मातम का गीत बन जाना चाहता हूँजैसे ढल रहा है ना आज का सूरजबस उसी तरह ढल जाना चाहता हूंदुनिया वाले पागल कहने लगे हैबस इसलिये दुनियादारी छोड़ देना चाहता हूँकिसी ने मुस्कान छीन ली मुझसेकिसी ने मेरा नसीब ही चुरा लियाअब और क्या लुटाऊँ औरो के ऊपरकुछ साँसे बची है अबकोई इसे भी ले जायेमैं तो अब पूरा का पूरा फकीर बन जाना चाहता हूँ

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2 Comments

  1. SALIM RAZA REWA 13/12/2018
  2. C.M. Sharma 14/12/2018

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