ग़ज़ल – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

अपने मखमली ख्वाब , ये ख्याल छोड़ दोउनके जिगर में उतरने का मलाल छोड़ दो।कोशिशें तेरी, सारे नापाक हो जायेंगेअपनी हरकतें ये बेरूखी चाल छोड़ दो ।ज़िद करनी, किसी को कभी रास नहीं आतीअपने ख्यालों में बुनना ये जाल छोड़ दो ।किसी का दिल जीत लेना, एक अलग बात हैजिगर में उतर जाने का जंजाल छोड़ दो।

बस की बात नहीं अब, प्यार को समझ लेनाकसक बहुत है, झमेला ये बवाल छोड़ दो ।

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3 Comments

  1. SALIM RAZA REWA 13/12/2018
  2. sarvajit singh 13/12/2018
  3. C.M. Sharma 14/12/2018

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