दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

दोहे- दो मासूमविलख गये मासूम दो, देखा जब ये हालउनकी मम्मी मर गयी,छाया देख मलाल।सुरा के संग बाप है, बेच खेत खलिहानये बेचारी दो बहन, दुनिया से अंजान।चिंता में वो पड़ गई , अक्ल गई अब मारभूख से वो तड़प रही, है विलकुल लाचार।बड़ी बहन की गोद में, छोटी भी हैरानकोई भी तो देख ले, कहाँ गया इंसान।दोहेविषय – स्वतंत्र

  1. तीन रंग का मेल है , आजादी का राजलहराती लहरा रही, हिन्द पताका आज।

छा गया व्यापार में, अंग्रेजी सरकारपैठ लगाके देश में, आये पाँव पसार।खूब हुड़दंग वो किये , बहुत किये उत्पातआपस में हम लड़ गये, हुये बहुत आघात।फांसी भी लटका दिये, था अन्याय अगाधमर्यादा सब तोड़ दिये, खूब किये अपराध।फूट डाल शासन किये, किये बहुत हैरानजो मिलकर हम एक बने, तो भागे शैतान।जरछ

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3 Comments

  1. SALIM RAZA REWA 13/12/2018
  2. डी. के. निवातिया 13/12/2018
  3. C.M. Sharma 14/12/2018

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