राह शूलों की – शिशिर मधुकर

चुकाते हैं आज कीमत, यहाँ हम अपनी भूलों कीतभी तो दिल की दुनिया में, चल रहे राह शूलों कीलाख कोशिश करी हमने, चोट ना कोई लग जाए मगर आदत नहीं बदली, आज तक इन बबूलों कीअगर पत्थर से हम होते, कोई भी ग़म नहीं होता हमे तो चाह रहती है मगर, बाहों के झूलों की सुखी हैं आज वो ही लोग, समय के संग जो बदलेंहम तो बस बात करते हैं, सदा अपने उसूलों कीहर कोई इस जहाँ में, अच्छा मुकद्दर थोड़े पाता हैमहर मिलती है मधुकर यहाँ, कुछ को रसूलों कीशिशिर मधुकर

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6 Comments

  1. Bindeshwar Prasad sharma 13/12/2018
    • Shishir "Madhukar" 13/12/2018
  2. C.M. Sharma 13/12/2018
    • Shishir "Madhukar" 13/12/2018
  3. डी. के. निवातिया 15/12/2018
    • Shishir "Madhukar" 15/12/2018

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