कह दो-कह दो- डी के निवातिया

कह दो-कह दो

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कह दो, कह दो, स्वामी तुम न आओगे !इस कलयुग में दरस तुम न दिखाओगे !!

सतयुग में लिए तुमने कई अवतारमत्स्य, कूर्म, वराह व नृसिंह ये चारदुष्ट्चरो ने जब पाप की सीमा लांघीये रूप धर कर किया था उनका संहारफिर क्यों इस युग में तुमने मुख है मोड़ाकब तक हमको ऐसे तुम तरसाओगे !!

कह दो, कह दो, स्वामी तुम न आओगे !इस कलयुग में दरस तुम न दिखाओगे !!

त्रेता युग में आये तुम बनकर रामराम-राज का था जग में बड़ा नामअहिल्या, शबरी को पाप से उतारेकितने पुण्य किये थे तुमने कामफिर क्यों इस युग में तुमने मुख है मोड़ाक्या इस बार न दानवो से बचाओगे !!

कह दो, कह दो, स्वामी तुम न आओगे !इस कलयुग में दरस तुम न दिखाओगे !!

द्वापर युग में आये बनके राधे-श्यामयशोदा के लाल किये जग में बड़ा नामद्रोपदी की लाज बचाई, किया पांडव उद्धारगीता के उपदेश में बताया जीवन का सारफिर क्यों इस युग में तुमने मुख है मोड़ाक्या इस बार ना भक्तों को पार लगाओगे !!

कह दो, कह दो, स्वामी तुम न आओगे !इस कलयुग में दरस तुम न दिखाओगे !!!!!स्वरचित : – डी के निवातिया

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12 Comments

  1. sarvajit singh 12/12/2018
    • डी. के. निवातिया 17/12/2018
  2. Bhawana Kumari 12/12/2018
    • डी. के. निवातिया 17/12/2018
  3. Shishir "Madhukar" 12/12/2018
    • डी. के. निवातिया 17/12/2018
  4. Bindeshwar Prasad sharma 13/12/2018
    • डी. के. निवातिया 17/12/2018
  5. C.M. Sharma 13/12/2018
    • डी. के. निवातिया 17/12/2018
  6. Ram Gopal Sankhla 04/01/2019
    • डी. के. निवातिया 02/02/2019

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