— भावना —

भावों के कोरे कागज पर
सूख गये है नयनों के रंग
भावनाओं के उड़ते पाखी
सतरंगी पाँखों से आखर
आकर कब लिख जाओगे ?
जी भर भाव बरसे आंगन
भीग न पाया अन्तर्मनमौन
पड़ी है अन्त:स वीणा
भीगे सुर सा भाव संवेदन
किन तारों पे गाओगे ?
मृदु भावना की अनगिन लहरें
मन के सागर में उफनती
भीगे सुर से भाव संवेदन मे
स्वर लहरी के बन्द दरवाज़े
क्या तुम खोल पाओगे ?
आ जाओ तो स्वप्नलोक में
दोनों ही भर लें उड़ान
होगी भाव भृगिंमा झँकृत
व्याकुल मन मे प्रेम पहचान
कब तक तुम ठुकराओगे
अब तो लौट के आओगे….

कपिल जैन

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8 Comments

  1. C.M. Sharma 12/12/2018
    • कपिल जैन 12/12/2018
  2. Bindeshwar Prasad sharma 12/12/2018
    • कपिल जैन 12/12/2018
  3. डी. के. निवातिया 12/12/2018
    • कपिल जैन 12/12/2018
  4. Shishir "Madhukar" 12/12/2018
    • कपिल जैन 12/12/2018

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