प्रेरणा….सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…..

नाहक डरते हो तुम…..दुःख से कभी सुख से….कभी रौशनी से मुंह फेर लेते हो…कभी अँधेरे से घबराते हो….जान कर भी तुम…अपने को नहीं पहचानते….मैं हर पल तुम्हें उद्वेलित करती हूँ….नस नस में तेरे…उमंग बन बहती हूँ…हर पल तुझे पुकारती हूँ….कदम दर कदम…तेरे पाँव के नीचे की ज़मीन का आभास देती हूँ….कौन सी राह पथरीली है….कहाँ दलदल है….कहाँ तू फिसलेगा…कब तू बिछडेगा अपनों से….कैसे मिलेगा सपनों से….आसमान में उड़ने के संग…ज़मीन की खुशबू का अहसास देती हूँ…सत्य असत्य का दर्पण हूँ….रिश्तों और शरीरों में बिखरी नहीं हूँ मैं….कण कण में व्याप्त मैं…अक्षुण ‘विशाल कण’ हूँ…जो विघटित नहीं होता…क्यूंकि….मैं कभी न जन्म लेती हूँ…न मरती हूँ…न आग जलाती है मुझे…न पानी गीला करता है….न घूप तपाती है मुझे…न छाँव ठंडक देती है….जन्म जन्मांतर से तेरे संग हूँ…पहचान मुझे….जिसने पहचाना…उसकी ही प्रेरणा बन गयी मैं….फिर वो…मेरी तरह कालजयी हो गया…\/सी.एम्.शर्मा (बब्बू)

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11 Comments

    • C.M. Sharma 17/12/2018
  1. Bindeshwar Prasad sharma 11/12/2018
    • C.M. Sharma 17/12/2018
  2. डी. के. निवातिया 11/12/2018
    • C.M. Sharma 17/12/2018
  3. kiran kapur gulati 12/12/2018
    • C.M. Sharma 17/12/2018
  4. Shishir "Madhukar" 12/12/2018
    • C.M. Sharma 17/12/2018
  5. Ram Gopal Sankhla 04/01/2019

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