दिल अब भी करीब है – अजय कुमार मल्लाह

कुछ दूर हूं मै उससे, कुछ दूर है वो मुझसे,पर ये भी सच है कि, दिल अब भी करीब हैं।हूँ जानता हकीक़त कि वो मेरी नहीं है अब,फिर क्यूं सहर ये दोपहर उसी के नाम है शब,कहे ये मुझसे ज़िन्दगी तु कितना बदनसीब है,पर ये भी सच है कि, दिल अब भी करीब हैं।मैं बेशक कहीं नहीं पर उसकी यादों में तो हूँ,जो उसने किए कभी उन झूठे वादों में तो हूँ,किया है दर्द ही महसूस ये इश्क़ कितना अजीब है,पर ये भी सच है कि, दिल अब भी करीब हैं।करूं रुख उसकी तरफ तो कदम रूक ही जाते हैं,कुछ घाव हैं दिल पे जो अब भी दुख ही जाते हैं,कि वो महलों की रानी है और तु शायर गरीब है,पर ये भी सच है कि, दिल अब भी करीब हैं।जानता हूँ हाल-ए-दिल उसका वो कहे ना कहे,फिकर तो रहेगी उसकी वो मेरी रहे ना रहे,मैं उसका भले नहीं कुछ वो मेरी ज़हनसीब है,पर ये भी सच है कि, दिल अब भी करीब हैं।

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3 Comments

  1. C.M. Sharma 10/12/2018
  2. Shishir "Madhukar" 12/12/2018

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