रावण

उस रावण में एक राम छिपा है कुछ मिलता जुलता नाम छिपा है मुझ रावण में कुछ भी तो नहीं मिलता बस झूठा सा अभिमान छिपा है। उस रावण का संसार बड़ा है दस दस सर का भार पड़ा है मुझ रावण का क्या है अपना हर पल झूठा सम्मान खड़ा है उस रावण का नाम बहुत है रामायण का वो पात्र प्रमुख है मेरी तो बस छोटी सी महाभारत है उसमें ही मेरा नाम विमुख है। उसको तो श्री राम ने मारा मुझको मेरे काम ने मारा वो हारा जग के मुखिया से मैं अपने ही रावण से हारा। चलो सीखे आज दशानन से कैसे सीता का सम्मान बचाएँ कम से कम रावण ही बन ले गर राम अगर ना भी बन पाए । अम्बिकेश

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2 Comments

  1. C.M. Sharma 07/12/2018
    • ambikesh 08/12/2018

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