दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

 तन को करते साफ हम, मन में रख कर मैलमानव मन को साफ रख, सत्य कर्म ही गैल ।गैल – मार्ग,शीत लहर की ठंड में, थर थर काँपे देहइस मौसम में आग से, बढ़ जाता है नेह।तट नदियों से कट रहा, हटा गाँव के गाँवहम गरीब का घर कहाँ, जहाँ तहाँ है ठाँव।शरद ऋतु का आगमन, पर हैं सब हैराननानी दादी कह रहीं ,ढ़को बदन तन कान।झूठी बातें बोल कर, क्यों करते गुमराह।मन की पीड़ा छोड़ दो , सच की देखो गाह ।गाह – कोई विशिष्ट कालमक्कारी अब छोड़ दो, खुद्दारी रख साथसत्य अहिंसा न्याय को, रखना अपने माथ।मायूसी में रो पड़े, देख देश की हालसीमा पर वो मर गये, फिर भी ठोके ताल।मेरे मन के मीत तुम, लिखे गजल या गीतशब्द शब्द तुम जोड़ के , भर देते हो प्रीत।

गिनती जन की बढ़ गयी, अंकवार विस्फोटजहाँ तहाँ अपराध है , करती सब पर चोट।

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3 Comments

  1. SALIM RAZA REWA 05/12/2018
  2. C.M. Sharma 06/12/2018
  3. डी. के. निवातिया 07/12/2018

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