ईमान – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

दौलत मिली ईमान बदल गयापाकर जिसे इंसान बदल गया।नसीहत देने वालों की कमी नहींबस अंदाज़-ए -निदान बदल गया।भरोसा कौन किस पर करेगा अबसच पैमाने का निशान बदल गया।ये आपसी रंजिश, अपना – परायारिश्तों – नातों का मान बदल गया।परिवार में हक था जिसका कभीउसका भी अब कमान बदल गया।आँखों में लाज हुआ करती थीउसमें उनका रुझान बदल गया।भला करने कोई नहीं आता अबलगता है हिन्दुस्तान बदल गया।

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3 Comments

  1. Bhawana Kumari 04/12/2018
  2. C.M. Sharma 05/12/2018
  3. डी. के. निवातिया 05/12/2018

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