तुम मामूली हो, मामूली बन कर रहो ना

गड़े मुर्दे मत उखाड़ो यारोकुछ लोगो की सुकून की नींदक्यों गायब करना चाहते होतुम मामूली हो , मामूली बन कर रहो नाये तो खेल है बस उनकाउनको ही खेलने दोतुम इस आग में अपने हाथ क्यों जलाते होकफन तो मिल रही है नाक्यों कोसते हो उनकोउन्हें कुछ हुआ ना तोवो तुम्हे तुम्हारी कब्र से भी उठा लेंगेतुम मामूली हो ,मामूली बन कर रहो नाहाथो में उँगलियाँ वोट देने के लिए रखोअगर ना बचे तुम ना तोवो तुम्हारी कटी उंगलियों से भी वोट डलवा लेंगेबस इनका शक्ल और ठिकाना बदल जायेगावो शिकारी है हर वक़्त निशाना तुम पर ही रहेगाउसने कह दिया कि मैं सेवक हूँऔर तुमने मान लियाआखिर जुमलो और हकीकत में फर्क करना कब सीखोगेमामूली हो शायद इसलिएआंखों में बड़े सपने पाल रखे होमेरी मानो तो चाय वाला बन जाओऔर साथ मे पकौड़े भी तलनाक्या पता कल तुम भी सरकार बन जाओखैर मामूली बन कर रहो तो ही अच्छा हैघर मे बीवी है ,बच्चे हैइतना तो समझोकाहे फिजूल में संविधान का पन्ना उलटाते होजमीर को मत जगाया करोउसे लंबी तान कर सोने दोतुम मामूली हो ,मामूली बन कर रहो ना—अभिषेक राजहंस

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4 Comments

  1. C.M. Sharma 01/12/2018
  2. रामगोपाल सांखला ``गोपी`` 01/12/2018
  3. Bhawana Kumari 02/12/2018
  4. Bindeshwar prasad sharma 03/12/2018

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