माटी मांगे प्रीत – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

माटी मांगे प्रीत यह, धरती रहे पुकारबातें फिजूल छोड़के, इसपे करें विचार।खून की होली अब तुम मत खेलोअपनी गलती दूसरे पर न ठेलो।आपस में मिलके हर बात बनाओदीपों के जैसा हर रात सजाओ।एक एक मिलके देखो, तब होगा उपकारबातें फिजूल छोड़के ………… ।।द्वेष अहंकार सब दूर करो अबलालच को भी चकनाचूर करो अब।पाप ना पालो तुम अपने मन मेंघमंड न रखना तूं अपने धन में।जीवन का है साथी, कर्म – धर्म आधारबाते फिजूल छोड़के…………… ।।लोक लाज तूं अपने वश में रखनाभूल न हो ऐसी हर किसी से कहना।बच्चों को भी संस्कार यह देनामांगे जितना उतना प्यार भी देना।चाह रहा हर कौम अब, हो जाए गुलजारबातें फिजूल छोड़के ………….. ।।कूटनीति की तो बात मत करनासत्य सनातन पर कायम ही रहना।प्रेम में जीतो सबके ही दिल तुमखुद रास्ता हो खुद ही मंजिल तुम।सोचा था जो हमने , वो सपना हो साकारछोड़के बातें फिजूल…………… ।।मानवता के तुम राह दिखलाओदानवता को तुम सबक सिखलाओ।धन पर ऐसे तूं गर्व ना करनासबको तो है एक दिन में मरना।यही रीत यही प्रीत , यही देखो संसारबातें फिजूल छोड़के इस पर करें विचार।।

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11 Comments

  1. दिनेश 28/11/2018
    • Bindeshwar Prasad sharma 06/12/2018
  2. C.M. Sharma 01/12/2018
    • Bindeshwar prasad sharma 03/12/2018
  3. रामगोपाल सांखला ``गोपी`` 01/12/2018
    • Bindeshwar prasad sharma 03/12/2018
  4. Bhawana Kumari 02/12/2018
    • Bindeshwar prasad sharma 03/12/2018
  5. kiran kapur gulati 10/12/2018
    • Bindeshwar prasad sharma 10/12/2018
  6. Vikram solanki 10/12/2018

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