साथी – शिशिर मधुकर

कोई कहीं से आए और मुझको संभाल लेकांटे सभी तन्हाई के मेरे उर से निकाल लेसाथी कोई ऐसा मिले जो मूरत हो प्रेम की मैं ही मैं बस जिसके जहन में ना उछाल लेजब जब कुहासा छाएगा जीवन की राह में साथी वही जो बस साथ में आए मशाल लेअपमान कोई कर दे जो जीवन की भीड़ में साथी वही जिसका लहू एकदम उबाल लेगुरबत में भी कुरबत ना जिसकी बदल सके साथी वही जो हर हाल में खुद को ही ढाल ले शिशिर मधुकर।

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2 Comments

  1. रामगोपाल सांखला ``गोपी`` 27/11/2018
    • Shishir "Madhukar" 28/11/2018

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