शरीक ए ग़म – शिशिर मधुकर

खास तुम हो गए जब से दीवाने हम हुए तेरेतुझे हमने सम्भाला था नैन जब नम हुए तेरेतुझे जब भीड़ घेरे थी हम तो बस दूर बैठे थेमगर अब पास हैं क्योंकि नज़ारे कम हुए तेरे अपनी खुशियां यहाँ तूने सदा गैरों से बांटी थी मगर तू जान ले हम तो शरीक ए ग़म हुए तेरे चोट अब भर गई तो तू ना मेरे पास आता हैसमय लम्बा सा गुजरा है बिना करम हुए तेरेदोष तेरा नहीं ये तो मेरी किस्मत का खेला हैबँध के जंजीर में मधुकर शिथिल क़दम हुए तेरेशिशिर मधुकर

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4 Comments

  1. C.M. Sharma 26/11/2018
    • Shishir "Madhukar" 26/11/2018
  2. डी. के. निवातिया 27/11/2018
    • Shishir "Madhukar" 28/11/2018

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