सेल्फ़ी रे

सेल्फ़ी ले-ले घूमता,   मानव विविध प्रकार।
कैसी उमंग मन में जगी, इच्छा अतृप्त अपार।।1

सेल्फ़ी अब जा चढ़ि,   खींची जो तस्वीर।
छवि मनोहर जो मिली, नयन कटीले तीर।।2

सेल्फ़ी अवतार है मिला, ख़ुश हैं हर इंसान।
चकाचौध है ज़िन्दगी, हुईं आदतें बड़ी महान।।3

परिधान धारण किए, और खिंची एक तस्वीर।
सेल्फ़ी ने पूरे किए,  करि मानव छवि प्रवीर।।4

उत्कण्ठित हर इंसान रे , देख मनोहर रूप।
सेल्फ़ी वह ले रहा, कर-कर बहु स्वरूप ।।5
                             -सर्वेश कुमार मारुत

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