सत्य जीतेगा – मधु तिवारी

🌹 *सत्य जीतेगा* 🌹 ….. मधु तिवारीशोषितों और दीनों पर, लिखने को कदम उठाया।चुप रहने को कहा हुआ, उसने तब तुम्हें बिठाया।न मानी जो तुमने बात, तब जूते पहन दबाया। कलम तुम्हारा तोड़ दिया, तू कुछ भी लिख ना पाया।रही सिसकती ही बेटी, चढ़ रही दहेज की भेंट।कई कई ऐसे मनचले जो, करते रहे आबरू मेंट।अन्याय अत्याचार से, यह देश तब जलने लगा। दबा हुआ जूतों से तू , हाथ को तब मलने लगा।कालरात्रि सम यहाँ तभी, चहुँदिश फिर अंधेरा था।ग्लानि दुख ने तब वहाँ पर, आकर तुझको घेरा था।सत्य उजागर करने को, जब भी कोई आता है।उसे रोकने के खातिर, तुरत दबाया जाता है।कलमधर को दबाने से, लेखनी कभी रुकेगी न। भले दबाओ जूतों पर, तेरे आगे झुकेगी न।जब जब नेक इरादों का, कथन दबाया जाएगा।तब तब उसके बदले में, नया कलमधर आएगा।जब जब सत्य को जग मे, कोशिश होगी मिटाने की। तब तब लोगों के दिल में, आग असत्य जलाने की। अमर रहेगा कलमकार, सत्य सदा ही जीतेगा।असत्य पथ पर जो चलते, वही हमेशा रीतेगा।✍🏻 श्रीमती मधु तिवारी, कपसदा, दुर्ग,छत्तीसगढ़।🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

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2 Comments

  1. Kiran Kapur gulati 22/11/2018
  2. C.M. Sharma 24/11/2018

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