कहने को तो ज़िंदा हूँ

कहने को तो ज़िंदा हूँबिन पंखों के उड़ता परिंदा हूँकुछ दिखाई नही देता है मुझेमैं तेरे इश्क़ में आँख वाला अंधा हूँनींदों का हिसाब हो गया है कब सेजब से तुमसे दिल का किया धंधा हूँतुम आज बता भी दोआखिर कब बतलाओगीनिगाहों से इशारे करोगीया पायल भी छमकाओगीइतनी कातिल नजरो से देखती हो क्योंक्या आज मेरा कत्ल कर जाओगीमेरे होने से पूरी होती हो तुमये कब अपने दिल को बतालाओगीखत को पूरा पढ़ने का इरादा हैया बिन पढ़े फाड़ जाओगीअपने बगीचे का फूल क्या तुम मेरे कब्र पर चढाओगी-अभिषेक राजहंस

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3 Comments

  1. डी. के. निवातिया 19/11/2018
    • Abhishek Rajhans 19/11/2018
    • Abhishek Rajhans 19/11/2018

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