मैं बस मैं बनकर रहना चाहता हूँ

मैं बस मैं बनकर रहना चाहता हूँअभावो की गोद में पला हूँदिन के उजाले को जीने के लिएरात-रात भर जागना चाहता हूँअब आईने में खड़ा हो करखुद पर गर्व करते देखना चाहता हूँमैं बस मैं बनकर जीना चाहता हूँकिसी और के दिखाए रास्ते पर नहीमैं अपनी राह खुद तलाशना चाहता हूंयश,अपयश की चिंता किये बिनाअपने तरीके से कुछ करना चाहता हूंकिसी और का भार स्वीकार नहींअपना बोझ खुद उठाना चाहता हूँज़िन्दगी को बहुत जी लिया बांध करअब अपने पंखों से उड़ना चाहता हूंपंक्तियों में पीछे रहना मंजूर नहींअब अपनी नयी कतार बनाना चाहता हूँचाहे कोई मुझे अभिमानी कहेपर मैं ज़िन्दगी अपनीअपने स्वाभिमान के साथ जीना चाहता हूँमैं बस मैं बनकर रहना चाहता हूँ–अभिषेक राजहंस

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  1. Shishir "Madhukar" 17/11/2018

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