तुम ठहर जाओ कभी…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)…

(जनाब मिर्ज़ा ग़ालिब साहिब की एक ग़ज़ल है “आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक…कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ़ के सर होने तक” इसी ज़मीन में लिखी मेरी यह ग़ज़ल आपकी नज़र…)तुम ठहर जाओ कभी, शब् के सहर होने तक….चैन साँसों को मिले, ख़त्म सफर होने तक….चल चलें और कहीं दूर उड़ें हम तब तक….खवाब आँखों में सजाये, जो नज़र होने तक….तुम चमक हुस्न अदा शोख पे इतराओ क्यूँ….फूल में नूर-न-बू इश्क़ नज़र होने तक…इश्क़ विश्वास ज़रूरी है निभाने के लिए….शक मगर जाए न, रिश्तों के ज़हर होने तक….आदमी कौन बुरा कौन यहां अच्छा है….आस्तीन सांप है, डसने की ख़बर होने तक…सबको मालूम वफ़ा इश्क़ जुनूँ का अंजाम….कौन परवाह करे, राख जिगर होने तक….आज फिर तुमने रुलाया-ओ-सताया मुझको….याद जाए न तेरी, मौत ‘चँदर’ होने तक….\/सी.एम्.शर्मा (बब्बू)

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14 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 15/11/2018
    • C.M. Sharma 19/11/2018
  2. Abhishek Rajhans 16/11/2018
    • C.M. Sharma 19/11/2018
  3. डी. के. निवातिया 19/11/2018
    • C.M. Sharma 24/11/2018
  4. rakesh kumar 23/11/2018
    • C.M. Sharma 24/11/2018
  5. kiran kapur gulati 25/11/2018
    • C.M. Sharma 26/11/2018
    • C.M. Sharma 03/12/2018
  6. Ram Gopal Sankhla 27/11/2018
  7. SALIM RAZA REWA 01/12/2018
    • C.M. Sharma 03/12/2018

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