काश – शिशिर मधुकर

दर्द ए दिल अगर तुझको कहीं कोई हुआ होताहवाओं ने मुझे फिर तो यहाँ आ के छुआ होताअगर सब जान लेते अपनी तो बस हार होनी हैकोई पासे नहीं चलता और ना कोई जुआ होतामुकद्दर रूठ बैठा पर कभी कुछ तो मिला होताअगर दिल से कहीं मुझको कोई देता दुआ होतासभी उम्मीदें टूटी हैं फ़सल तो मर गई कब की काश शुरुआत में ही बीज वो उन्नत बुआ होताअकेले पड़ गए मधुकर मगर ना हार मानी हैकाश लम्बे समर में मेरा भी एक पहरुआ होताशिशिर मधुकर

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4 Comments

  1. C.M. Sharma 15/11/2018
    • Shishir "Madhukar" 15/11/2018
      • C.M. Sharma 15/11/2018
        • Shishir "Madhukar" 15/11/2018

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