आज भी तुम

काश तेरी दीवानगी कोहमारे गुरूर ने सुन लिया होतातुमने जिस तरह चाहा थाहमने भी चुन लिया होतानिकाला था जो खतउसी किताब में रख दिया होताजो भी कहना था तुमसेकाश कह दिया होता——————————–अब तो बस लोग सियासतकरते हैं जज्बातों मेंअलग अलग चाहत का सौदाअलग अलग हालातों मेंअब तो ढो रहे हैं जिन्दगीचलती फिरती लाशों मेंआज भी तुम ताजा मुस्कातीमरे हुए अहसासों में

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4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 17/11/2018
    • Rakesh kumar 23/11/2018
  2. डी. के. निवातिया 19/11/2018
    • Rakesh kumar 23/11/2018

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