वो मेरी दोस्त

वो दोस्त मेरी मुझे औरो से कुछ अलग सी लगती हैमैं उससे कैसे कहूँवो मुझे मेरे जिस्म मेंरूह जैसी लगती हैउसके जन्मदिन पर दुआएं दूँ या ना दूँवो मुझे कहाँमुझसे जुदा सी लगती हैवो मुझे मंदिर का भगवानमस्जिद का ख़ुदा सी लगती हैवो मुझे मेरे कलम कीस्याही जैसी लगती हैमेरे मंजिल की आसानडगर सी लगती हैमैं उसे जुगुनू क्यो भेंट करूँवो तो मुझे सितारों के आसमान सी लगती हैवो दोस्त मेरी रहे हमेशाहाथ उठकर उसके जन्मदिन परये दुआ करता है–अभिषेक राजहंस

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  1. C.M. Sharma 12/11/2018

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