खुदा की रहमत – सर्वजीत सिंह

खुदा की रहमत

ना कोई धर्म होता है ना कोई जात होती है
महोब्बत में दोस्तों बस ऐसी ही बात होती है

दिल से दिल मिल जायें गर मोहब्बत में
फिर तो धरती पर ही कायनात होती है

चारों तरफ होता है खुशियों का सवेरा
ना फिर कभी कोई ग़म की रात होती है

मोहब्बत की कशिश खींच ही लेती है
चाहे बिछी नफ़रत की बिसात होती है

कौन किसको मिलने से रोक पाया है सर्वजीत
जब खुदा की रहमत की बरसात होती है

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M: 9324969494

6 Comments

  1. C.M. Sharma 12/11/2018
    • sarvajit singh 12/11/2018
  2. Shishir "Madhukar" 16/11/2018
    • sarvajit singh 10/12/2018
  3. डी. के. निवातिया 19/11/2018
  4. sarvajit singh 11/12/2018

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