मुक्तक – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

घुट घुट के ना मारो, इस दिल में असर होता हैएक बार ही जान ले लो , मन में क़हर होता है।ना उम्मीदी में रहम, अब थोड़ा भी तो कर दोजिंदगी हम सभी के लिये, एक सफ़र होता है।(क़हर – गुस्सा) जीत कर हार गये , मेरी मजबूरी थीपाने के लिये प्यार, ये भी जरूरी थी।जिद के खातिर मैंने, उनकी लाज रखीक्योंकि मेरी नजरों में , प्रीत अधूरी थी।परदे को अब परदा ही रहने दो, तो अच्छा हैजान गये जो हम, उसे कहने दो तो अच्छा है।ये नजाकत है आपकी, या कुछ और समझ लेंअंजुमन ए दिल को, पढ़ लेने दो तो अच्छा है ।

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

One Response

  1. C.M. Sharma 12/11/2018

Leave a Reply