नारी उत्थानं

नारी उत्थानं (राकेश कुमार )मैं नारी आतुर हूँहरदम तुझे बनाने कोहर पल तेरे साथ चलूँतुझे ऊपर उठाने कोतुम कमजोरी समझते होशर्म से पलकें झुकाने कोममता को मजबूरी समझाबहाना हाथ उठाने कोबदायूं में मारते होऔर कभी दिल्ली मेंपीसते हो नारी कोवर्चस्व की गली गली मेंरहनुमा रही हूँ मैंपुरूषों के अस्तित्व काकलियुग में इम्तिहानकैसा नारी सतित्व कादूध को लजाया तुमने और नींद मेरी रातों कीयाद नहीं आता तुम्हें चलनाऔर शिक्षा मेरी बातों कीक्या यही पुरूषार्थ तुम्हाराक्या यही नारी उत्थान हैबनाने वाली को लूटताकैसा ये इन्सान है

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

Leave a Reply