महबूब – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा – बिन्दु

हकीकत है या, कोई ख्वाब दिवाने काअदा उनकी है यह, या अंदाज़ लुभाने का।इतनी शोखी, मुहब्बत की महबूब हो तुमनजरें हों इनायत , मेहरबाँ शरमाने का।मन है तसव्वुर, हकीकत के मोहताज नहींमयस्सर हुआ देखकर, तुझे मुस्कुराने का।मुकद्दर किसी का , चंगा भला नहीं होताहर जिंदगी ही गुलाम है, इन अफसाने का।कभी पागल कह दिया, कभी दिवाना बिन्दु कोमौका मिला कहाँ, इश्क में गुनगुनाने का।

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

One Response

  1. Abhishek Rajhans 07/11/2018

Leave a Reply