मुक्तक

(1)मेरे कानों में आकर के , कोई आवाज देता हैतुम्हारे साथ बीतें पल के , सारे राज कहता हैगूँजती प्यार की धुन में , भले भूलूँ तुम्हे कैसेरखूँ जो हाथ कानों पर , तो दिल आवाज देता है……….(2)मोहब्बत के सफर में फिर से , रुठा यार मिल जायेगवायें भूल में आकर वो , फिर अधिकार मिल जायेमोहब्बत के बिना जीना भी , फिर कैसा हुआ जीनाखुदा जिन्दगी मेरी छूटे , या मेरा प्यार मिल जाये

 कवि – मनुराज वार्ष्णेय

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